मेरी तो खास जिंदगी है, इक एहसास की तरह!

मेरी तो खास जिंदगी है,
इक एहसास की तरह|
जलते कितने दिये हैं,
अंधेरे के लिये|
बुझ जाये अगर फिर तो,
अंधेरी रात की तरह|

मेरी तो खास जिंदगी है,
इक एहसास की तरह|

कोई पतवार न कश्ती की,
ना धारा ही मिला|
भंवर न मिला,
मौजों का सहारा न मिला|
डूबे हम हैं ऐसे,
सुखे पात की तरह|

मेरी तो खास जिंदगी है,
इक एहसास की तरह|

न सहारा है कोई,
ना ही साथी कोई|
बिछड़ जायें हम किससे,
साथ जब कोई नहीं|
अकेले चमन में फिरते हैं,
इक प्यास की तरह|

मेरी तो खास जिंदगी है,
इक एहसास की तरह|

अगर मुझे समझ जाओ,
सँवर जाये हम|
न टूटे कभी,
और ना बिखर पाये हम|
तेरी ही आश में जीते हैं,
इक विश्वास की तरह|

मेरी तो खास जिंदगी है,
इक एहसास की तरह|

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2 Responses to मेरी तो खास जिंदगी है, इक एहसास की तरह!

  1. Abha says:

    कोई पतवार न कश्ती की,
    ना धारा ही मिला|
    भंवर न मिला,
    मौजों का सहारा न मिला|
    डूबे हम हैं ऐसे,
    सुखे पात की तरह|…

    kitna dard liye hai ye rachna…
    khush raho hamesha..

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  2. sujata says:

    achchi rachna hain kafi..itna negative kyon? hmmmmmmmmm par rachna achchi hain..bahut

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