मैं यायावर! पथ का गमन, विश्राम मेरा!

मैं यायावर!
पथ का गमन,
विश्राम मेरा|

मैं मिला था,
कब किससे?
क्यूँ मिला था?
वो तो थे,
पथ के मेरे,
विराम अपने|
शेष समर की धुल,
चाटनी मुझे अब|
फांकना है गर्द का,
गुबार सारा|
शूल से सने मेरे,
आहार दे दो|
रख लो तुम,
व्योम का श्रृंगार सारा|
मैं अकिंचन!
है भ्रमण संधान मेरा|
मैं यायावर!
पथ का गमन,
विश्राम मेरा|

मैं चला हूँ,
अन्तः में संकल्प लेकर|
कहाँ तक?
शुन्य का विस्तार होगा|
इसकी परिभाषा,
जीते जी नहीं मिली तो|
ढूंढ़ लूंगा मैं,
मृत्यु के उस पार होगा|
सारी तड़प, सारी तपिश,
मुझे सौंप दो तुम|
यूँ ही जलना-बुझना,
है अभिमान मेरा|
मैं यायावर!
पथ का गमन,
विश्राम मेरा|

मेरी अस्थि, मेरा रोम,
तुम्हें समर्पित|
कर लो सृजन,
कुछ कर सको,
मेरे अंतिम क्षण का|
फिर तो मैं,
निर्बाध होकर चल पडूंगा|
निर्वात की काया में,
अपना सर्वस्व देने|
मैं ठहरता हूँ नहीं,
पाषण बनकर|
विधि यही,
है यही विधान मेरा|
मैं यायावर!
पथ का गमन,
विश्राम मेरा|

Advertisements

9 Responses to मैं यायावर! पथ का गमन, विश्राम मेरा!

  1. sujata says:

    very nice , very nice….path ka gaman vishram mera kya line hain..hmmm

    Like

  2. Munna JEE says:

    kafi achchi rachna —shukriya

    Like

  3. बहुत बढ़िया!!

    Like

  4. Priya Sharma says:

    nice very nice.
    mujhe aap ki rachana kaafi passand aaye.
    rachana ka title behaad koobsurat hai.
    main yayawar, path ka gaman, vishram mera.

    Like

  5. anil kant says:

    sach mere to man mein ek uthal puthal mach gayi ye rachna padh kar

    मेरी कलम – मेरी अभिव्यक्ति

    Like

  6. ''यायावर'' says:

    इस रचना को आप लोगों के द्वारा दिये सभी उपमाओं का मैं स्वागत करता हूँ, और अपेक्षा करता हूँ कि आपलोगों की सराहना निरंतर मेरे रचनाधर्म को प्रवाह देती रहेंगीं| धन्यवाद!

    Like

  7. तू गर ठहरा
    ठहर जाएगी
    नदी की गति…

    Like

  8. Dr Vishwas Saxena says:

    good Yayawar
    Thats the spirit1I have a poem written by me about me to share with you–you will feel that how both os are identical!
    सिंघनाद
    में सुखो की नर्म शैया पैर नहीं सोया हूँ
    कम हंस पाया सही पैर ढूखों से घबराकर नहीं रोया हूँ
    गर्दिश भरे जीवन के इस समर में में घायल हुआ पल पल
    पैर हर घाव ने मुझे सहलाया है
    और हर हार ने मनोबल बढाया है
    भूला नहीं अपनी जीत को मुझे याद है
    और अब सफलता के द्वार पैर यह मेरा सिंघनाद है –यह मेरा सिंघनाद है !
    with warm wishes your best fan
    Dr Vishwas Saxdena

    Like

  9. Bhagwati says:

    really a good one.
    title is too meaningful & every line has its own message.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: