हाँ! सच है ये…..!

मेरा लौटना भी तय था|
अगर गया होता मैं,
कहीं दूर तुम्हें छोड़कर|
और अब कि मैं,
ये समझ ही नहीं पाता,
तुम्हारे पास भी रहकर,
तुमसे इतना दूर क्यूँ हूँ|
इस एहसास ने आखिरकार,
बार-बार तुम्हारे पास,
भेजा मुझे, तुम्हें यह बताने के लिये,
मंजिल भी एक हैं अपने,
और रास्ते भी एक हैं|

हाँ! सच है ये,
नहीं संभल सकूँगा मैं,
मुझसे बेहतर ये तुम जानती हो,
इस उमिद्द में मैं बेचैन हो जाता हूँ,
कि अबतक तुमने,
मुझे संभाला क्यूँ नहीं?

ये पागलपन ही है,
तुम्हें पाने की|
और डर भी है,
तुम्हें खोने का|
इसलिये चिल्लाता हूँ मैं,
अपनी विवशता पर|
तुम्हारा आलिंगन इसलिये,
क्यूंकि तुम माँ की,
परछाई जैसी हो|
तुम्हारे आलिंगन में,
आनंद नहीं,
शांति है! ठहराव है! सुकून है!
वहां वक़्त भी ठहरता है,
महसूस किया है मैंने…..

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10 Responses to हाँ! सच है ये…..!

  1. Udan Tashtari says:

    हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका हार्दिक स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

    एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

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  2. बी एस पाबला says:

    हिंदी ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है।

    एक निवेदन: कृप्या वर्ड वेरीफिकेशन हटा लें तो टिप्पणी देने में सहूलियत होगी.

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  3. दिल दुखता है... says:

    हाँ! सच है ये,
    नहीं संभल सकूँगा मैं,
    मुझसे बेहतर ये तुम जानती हो,
    इस उमिद्द में मैं बेचैन हो जाता हूँ,
    कि अबतक तुमने,
    मुझे संभाला क्यूँ नहीं?
    बढ़िया लिखा है… बधाई हो.
    हिंदी ब्लॉग के लिए आपको शुभकामनाये

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  4. नारदमुनि says:

    narayan narayan

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  5. Anonymous says:

    Hi… aapki yeh kavita bahut hi achchi hai…i like it very much.

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  6. अनुराग रंजन सिंह "यायावर" says:

    इस रचना को आप लोगों के द्वारा दिये सभी उपमाओं का मैं स्वागत करता हूँ, और अपेक्षा करता हूँ कि आपलोगों की सराहना निरंतर मेरे रचनाधर्म को प्रवाह देती रहेंगीं| धन्यवाद!

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  7. संगीता पुरी says:

    बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  8. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर says:

    ब्लाग संसार में आपका स्वागत है। लेखन में निरंतरता बनाये रखकर हिन्दी भाषा के विकास में अपना योगदान दें।
    रचनात्मक ब्लाग शब्दकार को रचना प्रेषित कर सहयोग करें।
    रायटोक्रेट कुमारेन्द्र

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  9. रचना गौड़ ’भारती’ says:

    ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है।
    सुंदर रचना के लिए शुभकामनाएं।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    http://www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    http://www.chitrasansar.blogspot.com

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  10. Dr Vishwas Saxena says:

    dear anurag
    what is the use of a relationship which resides in the shadows of uncertainity! If you are scared of losing her then already implied that she is never yours—moreover she cannot be of anyone!do away with such mirage looking entities and spread your brilliance to overshadow her existence into a dark unnoticible speck of an unnoticed shadow! Demolish her by rebuilding yourself to such a height that you may steal every light.Be a yayawar of totality and not a lamented longer of a small temporary phase–Sorry technically poem may sound good but This not a poem i want you to be known for–Ponder and recharge your emotions for a good cause.Your still a best fan
    Dr Vishwas Saxena

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