मौन! का अर्थ गौण

मौन!
का अर्थ,
दो आयामों में गौण!

मुर्खता का अंधकूप या,
ज्ञान की व्यापकता!

सीमा तय करते एक साथ,
दो राहे तक आते ही,
पहचान अलग-अलग

फैसले का गुबार,
अपनी ओर खींचता,
न जाने कितनी समझ को,
फिर समाज पैदा होता,
हाँथ-पैर के जन्म लेने से पहले

तंद्रा भंग होते ही,
क्रांति या विनाश

समाज की समझ,
और दिशाहीनता,
साथ-साथ सर पटकती,
परिणाम के चौखट पर

तभी उद्दवेग आपा खोकर,
दिखाई देने लगता,
कभी सड़क पर,
कभी बज़ार के सैकडों की भीड़ पर,
कभी संसद पर,
तो कभी माँ-बहनों की अस्मत पर

हित-अहित का पक्ष अपना है,
हर डाली झुकी है,
अपने ही फल के बोझ से

कर्म चिपटा है,
अतीत से वर्तमान के,
फ़ासलों को तय करता हुआ,
भविष्य के मुँह तक

मौन!
फलसफ़ा है,
आस्तीन को छुपाने का
और सुबह की मीठी धुप भी

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One Response to मौन! का अर्थ गौण

  1. sajal says:

    mahashay!! apki rachnaon ki pristhabhumi adhyatm ki sankri galion se guzar kar aam sadko ko sametate huye kisi rahysamai kanwas ko ubharte jaati hai, vrihadtar aur aur vrihadtar….

    bhavisya ke liye shubkaamanye aur namaskar
    sajal!

    Like

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