अगर कह सको? कह अमन देश में है!

अगर कह सको? कह अमन देश में है!
यहाँ सेज काटों के सजते रहें हैं,
लहू से सने फूल पचते रहें है
भले जन्म कलिओं का होता कफ़न में,
मगर ढोल खुशिओं के बजते रहें है
अमीरी में कुत्ते भी रहते यहाँ पर,
गुज़र आदमी का कठिन देश में है

अगर कह सको? कह अमन देश में है!

विपुल धन बरसता यहाँ वादिओं में,
वतन ही सिमटता यहाँ खादिओं में
कहीं धन बिना जल रहीं दुल्हने है,
कहीं बाढ़ दौलत की है शादिओं में
लटकते हैं रेशम के पर्दे घरों में,
कहीं तन ढके ना वसन देश में है

अगर कह सको? कह अमन देश में है!

कहर गाँव पर है शहर बस रहें हैं,
सितारों पर चढ़कर नगर बस रहें हैं
अलग मुल्क में आदमी जी रहा है,
आवारों-नज़ारों के घर बस रहें हैं
“सुधारो” के सपने महल के लिये है,
गरीबी के चर्चे गहन देश में है

अगर कह सको? कह अमन देश में है!

अलग राग गुंजित, अलग ढोल बजता,
अलग बाग़ लगता, अलग फूल सजता
“बहारें” हैं चाहें बेढंगी ही क्यूँ न,
बहारों का अपना अलग राज होता
सफलता ही व्यक्ति पर कहर बन गयी है,
समुन्नत प्रजा का नमन देश में है

अगर कह सको? कह अमन देश में है!

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2 Responses to अगर कह सको? कह अमन देश में है!

  1. MADHAV CHANDRA CHANDEL says:

    वक़्त के साथ धूमिल होती हिंदी
    कहते हैं इसे भारत की बिंदी ,
    पहली बार इसे देखा
    वक्त के साए में विधवा होते हुए ,
    तभी आचानक ,,
    न जाने मैंने भी अन्ग्राइए लिया
    शायद वो मेरी हिन् भूल थी ,
    या मेरी हिन् सोंच थी
    की मैंने इसे किताबोंके पन्ने तक हिन् समझा
    समय के थापेरों ने में,
    वावासायी कारन के रफ्तार में मैं भी एक वैश्या बन गया
    पता हिन् न चला
    जन्मा ,बरा हुआ ,और भूल गया ,
    उन दो शब्दों को ,
    “माँ”
    जहाँ से हिंदी की सुरुआत हुई,
    माँ “mummy” में कब तब्दील हु ..और पिता “पाप में
    अजीब दास्ताँ हैं हिंदी की,

    भारत ..आपकी रचनाओं में आज के भारत में फिर से जान भरने की चमता है …..
    आपका ये प्रयास कभी विफल नहीं होगा ……हामरी सुभकामनाएँ सर्वदा आपके साथ
    हैं…
    अनुज माधव /०९/०८/२००८/पल्स मीडिया

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  2. rewa says:

    विपुल धन बरसता यहाँ वादिओं में,
    वतन ही सिमटता यहाँ खादिओं में
    कहीं धन बिना जल रहीं दुल्हने है,
    कहीं बाढ़ दौलत की है शादिओं में
    लटकते हैं रेशम के पर्दे घरों में,
    कहीं तन ढके ना वसन देश में है

    Sachchai ko ujagar karti pankityan!

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