मधु-हेतु ज़हर भी पीना है

जीवन जीना है खेल नहीं,
मधु-हेतु ज़हर भी पीना है
जब तक जीना है, जीना है

बदलाव नहीं हालातों की,
जादू है करिश्मा बातों की,
साँसों में पहरा दहशत का,
अंधियारी है यह रातों की,
गलबातों से ना काम चले,
यह अंधियारी भी पीना है

जब तक जीना है, जीना है
जीवन जीना है खेल नहीं,
मधु-हेतु ज़हर भी पीना है

कागज़ के नाँव यहाँ चलते,
खतरों ने ली अंगडाई है,
दोस्ती में कुस्ती होती हैं,
अपनों ने घात लगायी है,
जोखिम से भरी यह धरती है,
जिसपर सब बहा पसीना है

जब तक जीना है, जीना है
जीवन जीना है खेल नहीं,
मधु-हेतु ज़हर भी पीना है

जंगल के हैं कानून यहाँ,
उन्मुक्त न राग निकलता है,
परिवर्तन है! परिवर्तन है!
आँतों में आग सुलगता है,
हत-भाग भुलाने की खातिर,
यह बदहाली भी सीना है

जब तक जीना है, जीना है
जीवन जीना है खेल नहीं,
मधु-हेतु ज़हर भी पीना है

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One Response to मधु-हेतु ज़हर भी पीना है

  1. Dr Vishwas Saxena says:

    Dear Anurag
    life is epitome of hope.So whether you gulp elixir or potion of poison you have to sustain life.I warn you again no self pity please. Get youself set for enduring life than glorifying miseries.
    Your Best Fan
    Dr Vishwas Saxena

    Like

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