2. समर्पण है अंतिम पड़ाव, इससे पहले कोई इति नहीं!
4. ढूंढ़ता तन्हाइयों को इक खुले आकाश में!
5. समय के पार!
6. थमती हुई साँसों के आहट में छुपने को!
7. जीता रहा शब्दों को गढ़ने में!
9. मैं यायावर! पथ का गमन, विश्राम मेरा!
11.भाषणों से युग बदलने का नहीं
13.प्रकृति के परिदृश्य का, परिहास करने आ गये|
15.वात्सल्य की परिभाषा में “यायावर”
18.जो शाब्दिक भी नहीं! भाषिक भी नहीं!
21.“प्रश्न खडा था सामने, प्रतिउत्तर में जड़ जमाये”
22.“मंगल कलश दूध, शिशु को पियावे रे!”
23.“तू ही बता ऐ माँतृ-मूर्ति, तेरे अन्दर कौन है?”
24.अभी है सवेरा तुम्हारे सफ़र का!
29.अब फैसला हर ज़ुल्म का, करना है आपको!
30.कलम लेखको से लहू मांगती है!
31.अगर कह सको? कह अमन देश में है!
32.वक़्त पसरा यहाँ अजीबो-गरीब कतार में
36.“धरा के गर्भ में, सभ्यता की बीज”
38.देखा उसके अस्तित्व को खोता हुआ|
41.“यायावरी”
42.मैं गुम दस्ते जुनू, अज़ारे मुहब्बत में!
43.मेरी तो खास जिंदगी है, इक एहसास की तरह!
44.आँखों को सिमटता आसमान मिला!
45.कुछ पेंचों-ख़म, जिन्दगी में यूँ आएं!
46.इन्कलाब के लम्हों पर, क्यूँ इंतज़ार का पहरा है?
47.यह चरित्र भी जीवन का, विचित्र व्यथा पर रोता है!
48.अकेलापन!
51.गहराते संबंधों के बीच, फासला तय करता एक राही!
53. अभी नहीं करता तुम्हें, अंतिम प्रणाम!
54. राष्ट्रभाषा का तमगा मिले, तुम्हारी पैरवी करूँगा|
55. मृत्यु! आत्मा का अज्ञातवास!
59. स्पप्न के इस नीर में आकाश कितना!
60.


Aapne bahut dino se koi poem nahi dala hai…kuchh nayi aur achhi poem padhne ko dil kar raha hai. Kuchh kavitayen daliye.
rgds.
आपको नये साल की बहुत बधाई हो!
आशा ही नही ये विश्वास है कि आपकी कलम इस साल और भी कई नये कविताओं को जन्म देगी. कलम कभी ना रुकने पाए बस इसी आशा के साथ नव वर्ष की पुनः ढेर सारी बधाइयाँ.
सर्वथा ये याद रखें कि आपके द्वारा लिखी कविता महज एक कविता नही है! बल्कि इसमे समाए हैं आपके विचार, आपकी सोच, आपकी भावनाएँ, समाज को देने वाली कई नयी दिशाएं. आपकी लेखनी समाज को ज़िंदा रखने का पर्यास करती है जो इस पूरे देश को नयी जीवन देगी. इसलिए कृपया कभी भी लिखना बंद ना करें.
rgds.
[...] यायावरी [...]