खुरच रहा था उम्र को,
ये सोच कर पड़ाव पर|
मैं खाली हाथ क्यूँ रहा,
लक्ष्य के चढ़ाव पर|
समय के इस चक्र का,
आवर्तन क्यूँ अब गौण है?
मेरी इस आपत्ति पर,
स्वयं “मैं” में मेरा मौन है|
राह चलता ही रहा,
सूत्र के संधान में|
मेरी क्या है भूमिका,
विधि के विधान में|
शेष न संभव हो सका,
अवशेष के अन्तराल में|
गर्त में बढ़ता चला,
जो भी मिला उस काल में|


गम्भीर विमर्श।
——–
पुरूषों के श्रेष्ठता के जींस-शंकाएं और जवाब।
साइंस ब्लॉगर्स असोसिएशन के पुरस्कार घोषित।
आपको मेरी तरफ से नए साल की बहुत बहुत बधाई
http://dafaa512.blogspot.com/
बढिया लिखा है .. नया वर्ष आपके लिए मंगलमय हो !!
बहुत अच्छी कविता है.. ऐसा लग रहा है यह कविता अब कुछ पल के बाद विदा लेने वाला ये वर्ष का पूरा ब्योरा दे रहा है. यूँ तो कविता की एक एक पंक्ति बहुत अच्छी है, पर मुझे ये पंक्तियाँ बहुत ही अच्छी लगी.
समय के इस चक्र का,
आवर्तन क्यूँ अब गौण है?
मेरी इस आपत्ति पर,
स्वयं “मैं” में मेरा मौन है|
बहुत उम्दा रचना!
वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाने का संकल्प लें और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।
- यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-
नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!
समीर लाल
उड़न तश्तरी
आपको नये साल की बहुत बधाई हो!
आशा ही नही ये विश्वास है कि आपकी कलम इस साल और भी कई नये कविताओं को जन्म देगी. कलम कभी ना रुकने पाए बस इसी आशा के साथ नव वर्ष की पुनः ढेर सारी बधाइयाँ.
सर्वथा ये याद रखें कि आपके द्वारा लिखी कविता महज एक कविता नही है! बल्कि इसमे समाए हैं आपके विचार, आपकी सोच, आपकी भावनाएँ, समाज को देने वाली कई नयी दिशाएं. आपकी लेखनी समाज को ज़िंदा रखने का पर्यास करती है जो इस पूरे देश को नयी जीवन देगी. इसलिए कृपया कभी भी लिखना बंद ना करें.
बहुत खूब , क्या बात हैं, क्या रचना हैं…अनुराग जी..
राह चलता ही रहा,
सूत्र के संधान में|
मेरी क्या है भूमिका,
विधि के विधान में
बहुत ही अच्छी पंकितयां हैं…
खुरच रहा था उम्र को,
ये सोच कर पड़ाव पर|
मैं खाली हाथ क्यूँ रहा,
लक्ष्य के चढ़ाव पर|
आत्म मंथन ……. आरोहण के हर पड़ाव पर आवश्यक …. सुन्दर रचना
काफी सुन्दर पक्तियाँ लिखी है आपने…..
खुरच रहा था उम्र को,
ये सोच कर पड़ाव पर|
मैं खाली हाथ क्यूँ रहा,
लक्ष्य के चढ़ाव पर|
http://pinkivajpayee.blogspot.com/
It is a pleasure to read such wonderful creations — it exceeds the standard of writing that I have seen of late.
The seriousness of the matter and yet the fluidity of thoughts — simply brilliant.
I apologize for writing in English but I guess I have conveyed my thoghts. Eloquent and brilliance is yours Anurag.
Didi
Anurag..u and your write ups are simply marvelleous..i m really prod of you..keep it up!!
I Think its called—आत्ममंथन
ISn’t it??
well nice creation and hope will do better ,, u have given a nice defination for this short life. keep it up ………