कुछ दिनों से मैं,
निर्वात में हूँ|
मसलन, रात और दिन के,
गहराते संबंधों के बीच,
फासला तय करता एक राही|
पड़ाव भी अजीब-से,
कई राही अनजाने,
सूरतें अनजानी,
माथे पर गठरी लादे,
देखते हैं मुझे, टकटकी लगाए|
सोचता हूँ मैं!
अक्सर कुछ दिनों से,
देखता हूँ जब भी उनको|
और अन्तः संवाद की प्रक्रिया में,
पूछ बैठता हूँ अपने आपसे|
जाने क्या-क्या होगा गठरी में,
शायद! जीने का शाज़ो-सामान,
या फिर, रिश्तों की बन्दर-बाँट में बचा,
साँसों का टुकडा|
व्यक्तिगत होते ही,
तंद्रा भंग होती,
और अंतरद्वंद का परिणाम,
आरेखों से मेरी भितिचित्र को टटोल,
मुझसे उगलवा लेता,
मेरे मन की बात को|
हाँ, मैंने भी तो यही बांध रखा है,
औरों की तरह अपनी गठरी में भी|
जो मेरे कंधे पर लदी,
माथे से सटी,
बन्दर-बाँट में बची,
मेरे हिस्से के होने का एहसास कराती|
कुछ दूर तक,
फिर थोडी और दूर तक,
चलते-चलते मेरे पाँव थक-से जाते|
थकान मिटाने के प्रयास में,
कुछ दिनों से मैं,
निर्वात में हूँ|
मसलन, रात और दिन के,
गहराते संबंधों के बीच,
फासला तय करता एक राही|


बहुत गहरी रचना…पसंद आई:
शायद! जीने का शाज़ो-सामान,
या फिर, रिश्तों की बन्दर-बाँट में बचा,
साँसों का टुकडा|
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कुछ दिनों से मैं,
निर्वात में हूँ|
मसलन, रात और दिन के,
गहराते संबंधों के बीच,
फासला तय करता एक राही|
-बहुत उम्दा!!
या फिर, रिश्तों की बन्दर-बाँट में बचा,
साँसों का टुकडा|
वाह। अपने आप गहरा अर्थ लिए एक अच्छी रचना।
जिस दिन से हो गयी परायी रिश्तों की पहचान।
रोते रोते विदा हो गयी होठों से मुस्कान।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
http://www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
bahut hi umda rachna hain anurag ji..bahut hi umda….kya bat hain..baut badhiya lagi mujhe ye rachna….!!
samanya sahabdo me gahri darshnikta chhupi hai,badhi achchha likhte hai aap!
Dear yayawar
Please accept my heartiest congrats for a sensational poem.Your raving fate is soon coming to an end and soon you will find a serene stability in someones company, a company which is solely made for you[hope you understand what I mean].Open your ‘ghatri’in the presence of this company and usher into an era of endless pleasure which you deserve since long.Forget the pains you got in past and dress your scars into beuty points. God bless you.
your most endurant fan
Dr Vishwas Saxena