मैं गुम दस्ते जुनू,
अज़ारे मुहब्बत में|
मौजे गुरेज़ाँ जिंदगी,
खल्वत है आपकी|
सह्व हो गई कैफ के,
आगोश में|
ख़राबे विरानियाँ-सा मैं,
और हिज्र आपकी|
दिखती ता सुब्ह शबे,
माह हकीक-सी|
खुल्दे ख्याल की जहाँ में,
रुख आपकी|
मिसरे फरमाये हमने,
आँखों की नामनाकी से|
ठोकरों की तकलुफ्फ़ की खातिर,
मेरी सांसें हैं आपकी|


..ठोकरों की तकलुफ्फ़ की खातिर,
मेरी सांसें हैं आपकी|
khoobsurat..
दस्ते जुनू – पागलपन का जंगल|
अज़ारे मुहब्बत – प्रेम रोग|
मौजे गुरेज़ाँ – बिखरती हुई लहर|
खल्वत – तन्हाई|
सह्व – भूलचूक|
कैफ – मस्ती, नशा|
ख़राबे – खंडहर|
हिज्र – वियोग|
सुब्ह शबे माह – चांदनी रात|
खुल्दे ख्याल – ख्यालों की जन्नत|
मिसरे – कविता की पंक्तियाँ|
नामनाकी – गीलापन|
Tumhari kvita achi hai. Bhut aage bdhoge.
tumhari yaad aati hai.