कोसों-कोस बहता सफ़र,
साँसों के दस्तूर तक
है सिलसिला यूँ दूर तक
आहटें खामोश हैं,
वक़्त के इक शाख पर
आसमां सा दर्द है,
जख्म हैं नासूर तक
है सिलसिला यूँ दूर तक
परछाइयाँ है गुम कहीं,
है अंधेरा इस कदर
मेरी मुलाकात मुझसे नहीं,
सदियों से सुदूर तक
है सिलसिला यूँ दूर तक
अब नहीं मिलते मुझे,
ख़त के पुर्जे नाम के
गुमनाम सी है जिंदगी,
पता बस कुछ दूर तक
है सिलसिला यूँ दूर तक


waah